परम पूज्य प्रज्ञा श्रमणी वात्सल्यनिधि जिनधर्म प्रभाविका आर्यिका रत्न105 डॉ ज्ञेयश्री माताजी का चातुर्मास सुसनेर मध्यप्रदेश में हो रहा हैं
रथविहार के समय भगवान की आरती करके सरसों और अक्षत, पुष्प लेकर निम्न मंत्र पढ़कर सरसों मंत्रित कर रथ के आगे क्षेपण करें। पुन: रथ चलाने का श्लोक पढ़कर रथ को चलावें। परविद्याछेदन मंत्र- ॐ श्रीं ह्रीं ह्र्रं कलिकुंडदंडस्वामिन् अतुलबलवीर्यपराक्रम स्फ्रां स्फ्रीं स्फ्रूं स्फ्रें स्फ्रौं स्फ्रः आत्मविद्यां रक्ष रक्ष परविद्यां छिंद छिंद ह्रूं फट् स्व:।
यथा कोटिशिला पूर्वं, चालिता सर्वविष्णुभि:।
चालयामि तथोत्तिष्ठ, शीघ्रं चल महारथ।।
रथशीघ्रोच्चालनमंत्र:। नोट—रथयात्रा के बाद १००८ कलशों से या १०८ कलशों से महाभिषेक करना चाहिए।